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बारहवी मे 99.99 प्रतिशत अंक लेने वाले वार्शिल को चमकती दमकती दुनिया कभी लुभा नही पाई- शांति की तलाश मे अब बन गया जैनभिक्षु


user1 ,Vniindia.com | Saturday June 10, 2017, 09:35:41 | Visits: 522







सूरत, 10 जून (वी एन आई)बारहवी कक्षा मे 99.9 प्रतिशत अंक का टॉपर दुनियादारी मे नाम कमाने की बजाय दुनियादारी छोड़ साधु बन गया है. गुजरात में हाल में घोषित राज्य माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं के टॉपर रहे 17 साल के जैन धर्मावलम्बीवार्शिल शाह ने ्कल सन्यास दीक्षा ग्रहण कर ली। वार्शिल के परिवारजनो के अनुसार इस किशोर को चमकते दमकती दुनिया कभी अपनी और नही खींच पाई, दो साल पहले ही उसने सोच लिया था सब कुछ छोड़ जैन भिक्षु बन जायेगा
कामर्स के छात्र रहे वार्शिल का परीक्षा में 99.99 प्रतिशत अंक थे। आगे पढ़ाई करने की बजाय अध्यात्मिक रूझान के चलते उन्होंने यहां हजारो लोगों की मौजूदगी में जैन साधु बनने की दीक्षा ले ली। उनके रिश्तेदार राजुल शाह के मुताबिक वार्शिल का शुरू से ही दुनिया में चीजों से अधिक लगाव नहीं था। वह चार वर्ष की उम्र से ही उपवास आदि करते रहे थे। उन्हें नया नाम सुवीर्यरत्न विजयजी महाराज दिया गया है. वर्शिल 27 मई को आए गुजरात सेकेंड्री एंड हायर सेकेंड्री एजुकेशन बोर्ड रिजल्ट में टॉप करने वाले छात्रों में से था। टॉप करने के बाद भी उनके यहां कोई खास सेलिब्रेशन नहीं हुआ था। वर्शिल का परिवार जैन धर्म का अनुयायी है और चकाचौंध की दुनिया से दूरी बनाकर रखता है।वार्शिलके पिता जिगर शाह आयकर अधिकारी हैं और मॉ अमिबेन शाह गृहणी।

वर्शिल की माता अमिबेन शाह और पिता जिगरभाई खुश हैं कि उनके बेटे ने यह रास्ता चुना। इस दंपति ने बेटे वर्शिल और बड़ी बेटी जैनिनी का पालन बेहद साधारण तरीके से किया है। वह जैन धर्म के कितने बड़े अनुयायी हैं इसका अंदाजा इसे से लगा सकते हैं कि घर में बिजली के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। परिवार का मानना है कि बिजली पैदा करने की प्रक्रिया में कई मासूम जानवरों की जान जाती है, जोकि जैन धर्म के खिलाफ है। घर में टीवी और फ्रिज भी नहीं है। बिजली का इस्तेमाल सिर्फ तभी किया जाता है जब बहुत आवश्यक हो, जैसे रात में पढ़ाई के वक्त।

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