Breaking News
आज का दिन :         ||           रविशंकर प्रसाद ने कहा आतंक और कट्टरता के लिए न हो सोशल मीडिया का इस्तेमाल         ||           रानिल विक्रमसिंघे ने कहा पारदर्शिता साइबर स्पेस का अभिन्न अंग         ||           नागपुर टेस्ट में एक बार फिर पिच के तेज गेंदबाजों के अनुकूल होने की उम्मीद         ||           सेंसेक्स 27 अंकों की तेजी पर बंद         ||           फिल्म 'पद्मावती' को ब्रिटेन में 1 दिसंबर को रिलीज करने की मंजूरी         ||           एशेज टेस्ट में विंस और स्टोनमैन के अर्धशतकों के बाद आस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की वापसी         ||           प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री से मुलाकात की         ||           राष्ट्रपति कोविंद ने दिवालियापन संहिता अध्यादेश को दी मंजूरी         ||           भारतीय बास्केट में कच्चे तेल की कीमत 61.54 डॉलर प्रति बैरल         ||           पीवी सिंधु हांगकांग ओपन के क्वार्टर फाइनल में         ||           अब गुजरात विधानसभा चुनाव में होगी 'मन की बात, चाय के साथ'         ||           उप्र के अल्पसंख्यक मंत्री मोहसिन रजा का निकाह पंजीकरण रद्द         ||           प्रधानमंत्री मोदी ने कहा सुनिश्चित करना होगा, विरोधी ताकतें डिजिटल स्पेस को खेल का मैदान न बनाएं         ||           श्री केनेथ इयॉन जस्टर ने संभाला भारत मे अमरीका के राजदूत का कार्यभार         ||           शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा मानुषी छिल्लर ने हमें गौरवान्वित किया         ||           कंगना रनौत 'मणिकर्णिका' के सेट पर घायल हुईं         ||           मिस्र की वायु सेना ने हथियारों से लदे 10 वाहन नष्ट किए         ||           परिणीति चोपड़ा ने कहा हमेशा से 'मास एंटरटेनर' का हिस्सा बनना चाहती थी         ||           कश्मीर में पहली बार पथराव करने वालों के खिलाफ एफआईआर वापस होगी         ||           
close
Close [X]
अब तक आपने नोटिफिकेशन सब्‍सक्राइब नहीं किया है. अभी सब्‍सक्राइब करें.

Home >> छत्तीसगढ़ के पर्वत पर पांडवों ने गुजारा था अज्ञातवास

छत्तीसगढ़ के पर्वत पर पांडवों ने गुजारा था अज्ञातवास


admin ,Vniindia.com | Saturday August 05, 2017, 09:23:00 | Visits: 86







बीजापुर, 5 अगस्त। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में दक्षिण बस्तर जिला मुख्यालय से 72 किलोमीटर दूर तेलंगाना की सीमा पर स्थित पुजारी कांकेर ऐसा गांव है, जहां आज भी पांडवों की पूजा होती है। पांचों पांडव भाइयों के लिए अलग-अलग पुजारी भी नियुक्त किए गए हैं। यह परंपरा यहां कई सौ साल से चली आ रही है।



ग्रामीणों का मानना है कि गांव के पास स्थित विशाल पर्वत पर पांडवों ने अपना अज्ञातवास गुजारा था। इसी वजह से पहाड़ का नाम पांडव पर्वत रखा गया है। पहाड़ के ऊपर एक मंदिर है, जिसकी घंटी अपने आप बज उठती है। इस मंदिर के अलावा गांव वालों ने गांव की सरहद पर धर्मराज (युधिष्ठिर) मंदिर भी बना रखा है, जहां हर दो साल में एक बार मेला लगता है। ऐसी मान्यता है कि इस मेले में शामिल होने के लिए 25 गांवों के देवी-देवता पहुंचते हैं।



गांव के पुजारी दादी राममूर्ति ने बताया, "मान्यता के अनुसार कौरवों के हाथ अपना सब कुछ गंवा देने के बाद पांडव जब अज्ञातवास पर निकले तो उस दौरान उन्होंने अपना कुछ समय दंडकारण्य में गुजारा था। इसमें से एक इलाका पुजारी कांकेर का भी था। जब पांडव यहां पहुंचे थे, तब उन्होंने दुर्गम पहाड़ पर स्थित गुफा से प्रवेश किया था और यहीं आश्रय लिया था, इसलिए बाद में इस पहाड़ का नाम दुर्गम पहाड़ के स्थान पर पांडव पर्वत रखा गया। उनके मुताबिक, पांडव इस पर्वत से होकर गुजरने वाली सुरंग से होकर भोपालपटनम के पास स्थित सकलनारायण गुफा से निकले थे, जहां वर्तमान में श्रीकृष्ण की मूर्ति है। हर साल वहां सकलनारायण मेला लगता है।



पुजारी कहते हैं कि उनके पूर्वजों द्वारा पांडव पर्वत में पांडवों के नाम पर मंदिर का निर्माण भी किया है। कोई भी व्यक्ति वहां नहीं पहुंच पाता है, इसलिए गांव के सरहद पर धर्मराज युधिष्ठिर के नाम का मंदिर बनाया गया है और पांचों पांडवों की पूजा के लिए अलग-अलग पुजारी नियुक्त किए गए हैं। अर्जुन की पूजा के लिए राममूर्ति दादी, भीम के लिए दादी अनिल, युधिष्ठिर के लिए कनपुजारी, नकुल के लिए दादी रमेश व सहदेव के लिए संतोष उड़तल को पुजारी बनाया गया है। हर दो साल में धर्मराज मंदिर में मेला लगता है। यहां आने वाले श्रद्धालु अपने कामना और मन्नत के अनुसार, बकरे और मुर्गो की बलि चढ़ाते हैं। यह मेला अप्रैल माह में बुधवार के दिन ही आयोजित किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि पूजा पाठ और पुजारियों का गांव होने के कारण ही उनके गांव का नाम पुजारी कांकेर रखा गया है। --आईएएनएस

 



Latest News




कमेंट लिखें


आपका काममें लाइव होते ही आपको सुचना ईमेल पे दे दी जायगी

पोस्ट करें


कमेंट्स (0)


Sorry, No Comment Here.

संबंधित ख़बरें