Breaking News
पत्रकार से नेता बने आशुतोष ने आम आदमी पार्टी से दिया इस्तीफा         ||           प्रधानमंत्री मोदी ने लालकिले से सुनाई कविता, अंबर से ऊंचा जाना है         ||           प्रधानमंत्री मोदी ने कहा 2022 तक भारतीय यान से अंतरिक्ष में जाएगा हिन्दुस्तानी         ||           प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से कहा ये देश ना झुकेगा, ना रुकेगा और ना ही थकेगा         ||           प्रधानमंत्री मोदी ने कहा ईमानदार करदाताओं की वजह से गरीबों के पेट भर पाती है सरकार         ||           सेरेना ने सिनसिनाटी मास्टर्स में जीत से आगाज किया         ||           विशाल भारद्वाज की फिल्म का पोस्टर प्रियंका चोपड़ा ने शेयर किया         ||           'मौत'के बाद भी 'जिंदा' हुई एक नहर         ||           जाने, क्या है राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना         ||           भारतीय हॉकी टीम एशियन गेम्स 2018 के लिए जकार्ता रवाना हुई         ||           राहुल गाँधी ने रूपये में गिरावट को लेकर मोदी का पुराना वीडियो शेयर किया         ||           आज का दिन : अभिनेता शम्मी कपूर         ||           नीतीश ने 'एक देश-एक चुनाव' पर कहा यह संभव नहीं         ||           कांग्रेस की एकसाथ चुनाव पर प्रधानमंत्री मोदी को चुनौती         ||           एमके स्टालिन ने कहा अगर मेरे पिता को मरीना बीच पर दफनाने की जगह ना मिलती तो मर ही जाता         ||           सेंसेक्स 207 अंक की तेजी पर बंद         ||           चुनाव आयुक्त ने कहा बिना संशोधन के पूरे देश में संभव नहीं एक साथ चुनाव         ||           सरकार ने रुपये में ऐतिहासिक गिरावट के बाद कहा चिंता की कोई बात नहीं         ||           छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलरामदास टंडन का निधन         ||           कांग्रेस-विपक्ष ने रुपया 70 के पार जाने को लेकर मोदी सरकार पर साधा निशाना         ||           
close
Close [X]
अब तक आपने नोटिफिकेशन सब्‍सक्राइब नहीं किया है. अभी सब्‍सक्राइब करें.

Home >> बैद्यनाथ धाम मंदिर, जहां 'पंचशूल' के दर्शन मात्र से होती है मनोकामना पूरी

बैद्यनाथ धाम मंदिर, जहां 'पंचशूल' के दर्शन मात्र से होती है मनोकामना पूरी


admin ,Vniindia.com | Sunday August 06, 2017, 09:40:19 | Visits: 414







देवघर, 6 अगस्त | भारत के प्रसिद्ध शैव तीर्थस्थलों में झारखंड के देवघर का बैद्यनाथ धाम (बाबाधाम) अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैद्यनाथ धाम का कामना लिंग द्वादश ज्योतिर्लिगों में सर्वाधिक महिमामंडित कहा जाता है। यही कारण है कि यहां के ज्योतिर्लिग पर जलाभिषेक करने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके शीर्ष पर त्रिशूल नहीं, 'पंचशूल' है, जिसे सुरक्षा कवच माना गया है। 



धर्माचार्यो का इस पंचशूल को लेकर अलग-अलग मत है। मान्यता है कि पंचशूल के दर्शन मात्र से ही भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं। मंदिर के तीर्थ पुरोहित दुर्लभ मिश्रा आईएएनएस को बताते हैं, "धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि भगवान शंकर ने अपने प्रिय शिष्य शुक्राचार्य को पंचवक्त्रम निर्माण की विधि बताई थी, जिनसे फिर लंकापति रावण ने इस विद्या को सिखा था। पंचशूल की अजेय शक्ति प्रदान करता है। कहा जाता है कि रावण ने लंका के चारों कोनों पर पंचशूल का निर्माण करवाया था, जिसे राम को तोड़ना आसान नहीं हो रहा था। बाद में विभिषण द्वारा इस रहस्य की जानकारी भगवान राम को दी गई और तब जाकर अगस्त मुनि ने पंचशूल ध्वस्त करने का विधान बताया था। रावण ने उसी पंचशूल को इस मंदिर पर लगाया था, जिससे इस मंदिर को कोई क्षति नही पहुंचा सके।



मिश्र कहते हैं, "त्रिशूल' को भगवान का हथियार कहा जाता है, परंतु यहां पंचशूल है, जिसे सुरक्षा कवच के रूप में मान्यता है। भगवान भोलेनाथ को प्रिय मंत्र 'ओम नम: शिवाय' पंचाक्षर होता है। भगवान भोलेनाथ को रुद्र रूप पंचमुख है। उन्होंने कहा कि सभी ज्योतिर्पीठों के मंदिरों के शीर्ष पर 'त्रिशूल' है, परंतु बाबा बैद्यनाथ के मंदिर में ही पंचशूल स्थापित है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कवच के कारण ही इस मंदिर पर आज तक किसी भी प्राकृतिक आपदा का असर नहीं हुआ है। कई धर्माचार्यो का मानना है कि पंचशूल मानव शरीर में मौजूद पांच विकार-काम, क्रोध, लोभ, मोह व ईष्र्या को नाश करने का प्रतीक है। मंदिर के पंडा जयकुमार द्वारी आईएएनएस से कहते हैं कि पंचशूल पंचतत्वों-क्षिति, जल, पावक, गगन तथा समीर से बने मानव शरीर का द्योतक है।



मान्यता है कि यहां आने वाला श्रद्धालु अगर बाबा के दर्शन किसी कारणवश न कर पाए, तो मात्र पंचशूल के दर्शन से ही उसे समस्त पुण्यफलों की प्राप्ति हो जाती है। उन्होंने बताया, "मुख्य मंदिर में स्वर्ण कलश के ऊपर लगे पंचशूल सहित यहां बाबा मंदिर परिसर के सभी 22 मंदिरों पर लगे पंचशूलों को साल में एक बार शिवरात्रि के दिन पूरे विधि-विधान से नीचे उतारा जाता है और सभी को एक निश्चित स्थान पर रखकर विशेष पूजा कर फिर से वहीं स्थापित कर दिया जाता है। गौरतलब बात है कि पंचशूल को मंदिर से नीचे लाने और फिर ऊपर स्थापित करने का अधिकार स्थानीय एक ही परिवार को प्राप्त है। गौरतलब है कि वर्ष भर शिवभक्तों की यहां भारी भीड़ लगी रहती है, परंतु सावन महीने में यह पूरा क्षेत्र केसरिया पहने शिवभक्तों से पट जाता है। भगवान भोलेनाथ के भक्त 105 किलोमीटर दूर बिहार के भागलपुर के सुल्तानगंज में बह रही उत्तर वाहिनी गंगा से जलभर कर पैदल यात्रा करते हुए यहां आते हैं और बाबा का जलाभिषेक करते हैं। --आईएएनएस



Latest News




कमेंट लिखें


आपका काममें लाइव होते ही आपको सुचना ईमेल पे दे दी जायगी

पोस्ट करें


कमेंट्स (0)


Sorry, No Comment Here.

संबंधित ख़बरें