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अपने संस्कारो, जड़ो, मूल्यो से हमेशा जुड़े रहे - आचार्य श्री विद्यासागर


admin ,Vniindia.com | Sunday December 03, 2017, 02:29:20 | Visits: 60







चंद्रगिरि, डोंगरगढ़, 3 दिसंबर (वीएनआई) दार्शनिक संत शिरोमणि 108 आचार्श्री विद्यासागर महाराज जी ने कहा है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मातृभूमि से हमेशा जुड़े रहना चाहिये, अपनी जड़े, अपने मूल्य संस्कार उसे कभी  भूलना नही चाहिये. 



अगर किन्ही क्षणो मे वे अपनी जड़ो से दूर हो भी जाते है तो समय रहते अगर "वापसी" हो जाती है यानि सुबह का भूला शाम को वापस आ जाये तो उसे भूला नहीं कहते. यहा एक धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्यश्री ने बताया कि किसी भी वक्त आप सही रास्ते पर आ सकते है, इससे पहले बहुत देर हो जाये और आप वापस नही लौट पाये. एक दृष्टांत के माध्यम से उन्होंने बताया की एक पिता अपने बेटे को सही राह बताता  रहता था वह चाहता बेटा अपनी मिट्टी का सम्मान करे है अपनी जड़े,  अपने मूल्य  संस्कार का सम्मान करे,परन्तु बेटे को पिता की बात कम समझ में आती है वह केवल अपनी इच्छा पूर्ति हेतू सब कुछ वही छोड़ परदेस  भागता है और उसमे सफलता भी प्राप्त करता है ।  जब उसके पास उसकी इच्छा अनुरूप सभी साधन और सुविधाएँ उपलब्ध हो जाती है तो वह  सोचता है की उसके पास आज सभी चीजें जो वो अपनी ज़िन्दगी में चाहता है उसके पास उपलब्ध है किन्तु मन में शांति नही है, तब उसे अपने पिता की बात याद आती है और वह अगले दिन देश वापस आता है और अपने देश की मिट्टी को माथे से लगता है और फिर अपने पिता से मिलता है। पिता उसे देखकर खुश हो जाते हैं और एक पिता अपने बेटे के कार्यानुसार उसके भविष्य को अच्छी तरह जानता है । उन्हें मालूम था की एक दिन उनका बेटा सही राह (धर्म की राह) पर जरुर आएगा ।

 

आचार्यश्री ने कहा कि चंद्रगिरी में भी जगदलपुर से आये श्रद्धालुओ को देखकर  उन्हे प्रसन्नता हुई की आप लोग अपनी मातृभूमि से जुड़े हुए हैं । प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मातृभूमि से हमेशा जुड़े रहना चाहिये जिससे की उसके संस्कार हमेशा बने रहे । जगदलपुर में पंचकल्याणक की भूमिका डोंगरगांव में मात्र एक दिन में बनी थी यह वहाँ के लोगों का पुण्य है और उनका प्रयास भी सराहनीय है जो इतना बड़ा कार्य कर रहे हैं । जगदलपुर एक आदिवासी इलाका है वहाँ जिन मंदिर होना अपने आप में एक अलग बात है इससे वहाँ के आस - पास के लोग भी जुड़ सकेंगे जैसे कोंडागांव, गीदम आदि । यह एक आदिवाशी बहुल क्षेत्र प्रकृति की गोद में है जो की अपने आप में एक प्राकृतिक सुन्दरता धारण किये हुए है । आज आचार्य श्री को आहार कराने का सौभाग्य ब्रह्मचारिणी दीप्ती  दीदी बंडा निवासी के यहाँ हुए । इसके लिये चंद्रगिरि ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री सुरेश जैन, कार्यकारी अध्यक्ष श्री किशोर  जैन,  डोंगरगढ़ जैन समाज के अध्यक्ष एवं चंद्रगिरि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष श्री सुभाष चन्द जैन, प्रतिभास्थली के संयुक्त मंत्री  एवं चंद्रगिरि ट्रस्ट के ट्रस्टि श्री सप्रेम जैन, श्री अमित जैन, श्री चंद्रकांत जैन, श्री निखिल जैन, श्री सारांश  जैन एवं सकल जैन समाज डोंगरगढ़ ने उन्हे बधाई एवं शुभाकामनायें दी 



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