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गीतकार शैलेंद्र के जन्मदिन पर


admin ,Vniindia.com | Wednesday August 30, 2017, 02:24:00 | Visits: 81







खास बातें


1 गीतकार शैलेंद्र के जन्मदिन पर

   नयी  दिल्ली 30 -08-2017,सुनील कुमार ,वी एन  आई



 



 'शैलेन्द्र' का जन्म: 30 अगस्त, 1923 रावलपिंडी, (पाकिस्तान)  में और  मृत्यु: 14 दिसंबर, 1966 मुंबई में   हुई  हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध गीतकार थे। ‘होठों पर सच्चाई रहती है, दिल में सफाई रहती है', 'मेरा जूता है जापानी,' ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’ जैसे दर्जनों यादगार फ़िल्मी गीतों के जनक शैलेंद्र ने महान् अभिनेता और फ़िल्म निर्माता राज कपूर के साथ बहुत काम किया।



 



शैलेन्द्र जी के पिता फ़ौज में थे। बिहार के रहने वाले थे। पिता के रिटायर होने पर मथुरा में रहे, वहीं शिक्षा पायी। घर में भी उर्दू और फ़ारसी का रिवाज था, लेकिन शैलेन्द्र की रुचि घर से कुछ भिन्न ही रही। हाईस्कूल से ही राष्ट्रीय ख़याल थे। सन 1942 में बंबई रेलवे में इंजीनियरिंग सीखने गये। अगस्त आंदोलन में जेल भी गये। लेकिन कविता का शौक़ बना रहा।



 



 



अगस्त सन् 1947 में श्री राज कपूर एक कवि सम्मेलन में शैलेन्द्र जी को पढ़ते देखकर प्रभावित हुए। और फ़िल्म 'आग' में लिखने के लिए कहा किन्तु शैलेन्द्र जी को फ़िल्मी माहौल  पसंद  न था । सन् 1948 में शादी के बाद कम आमदनी से घर चलाना मुश्किल हो गया। इसलिए श्री राज कपूर के पास गये। उन दिनों राजकपूर बरसात फ़िल्म की तैयारी में जुटे थे। तय वक्त पर शैलेन्द्र राजकपूर से मिलने घर से निकले तो घनघोर बारिश होने लगी। क़दम बढ़ाते और भीगते शैलेन्द्र के होंठों पर ‘बरसात में तुम से मिले हम सनम’ गीत ने अनायास ही जन्म ले लिया। अपने दस गीत सौंपने से पहले शैलेन्द्र ने इस नए गीत को राजकपूर को सुनाया। राजकपूर ने शैलेन्द्र को सीने से लगा लिया। दसों गीतों का पचास हज़ार रुपये पारिश्रमिक उन्होंने शैलेन्द्र को दिया। नया गीत बरसात का टाइटिल गीत बना। गीत चले, फिर क्या था, उसके बाद शैलेन्द्र जी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।



 



कुछ  फ़िल्में  जो    शैलेन्द्र  के      गीतों  से    सजी  थीं -बरसात , आवारा ,अनाड़ी , श्री  420 ,सँगम ,गाइड ,कालाबाज़ार ,दिल अपना  प्रीत  पराई !  



 



निर्देशक ,गीतकार  गुलज़ार  के  अनुसार , शैलेन्द्र   एक    सम्पूर्ण  गीतकार  थे !



 



 



 



 



 



 



 



 



   



 



 



 



 



 



 



 



 



 



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