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ब्रह्मकुन्ड :मकर संक्रांति के पर्व पर जहा श्रद्धालु प्राकृतिक ऊष्मा से गर्म सरोवर में करते है स्नान


Vniindia.com | Thursday January 14, 2016, 04:25:21 | Visits: 1022







पटना 14 जनवरी अनुपमा जैन(वीएनआई) मकर संक्रांति के पर्व पर जहा श्रद्धालु जहा देश भर में पवित्र नदियों और सरोवरों में खून जमाने वाले ठंडे पानी में डुबकी लगाकरसूर्य देवता को अर्घ्य दे कर नमन करते है वही देश में एक ऐसा पवित्र सरोवर भी है जहा श्रद्धालु इस पर्व पर विशेष तौर पर इस पवित्र सरोवर में प्राकृतिक ऊष्मा से गर्म सरोवर में स्नान करते है, सूर्य देवता को अर्घ्य देते है.यह सरोवर है पटना से 100 किमी उत्तर में पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसे तीर्थ स्थल राजगीर में जहा के“ब्रह्मकुन्ड” का पानी काफी गर्म यानी 45 डिग्री तक गर्म रहता है और यह औषधीय गुणों से भी भरपूर है.
यहाँ के वैभव पर्वत की सीढ़ियों पर मंदिरों के बीच गर्म जल के कई झरने (सप्तधाराएं) हैं जहां सप्तकर्णी गुफाओं से जल आता है। इन झरनों के पानी में कई चिकित्सकीय गुण होने के प्रमाण मिले हैंऔर पर्यटकों की भीड़ को आकर्षित करता है। । इनमें “ब्रह्मकुन्ड” का पानी सबसे गर्म (45 डिग्री से.) होता है।। ब्रह्मकुंड व्यापक रूप से प्रख्यात औषधीय गुणों वाले गर्म पानी के झरने के लिए जाना जाता है यहां मकर संक्रांति के मौके पर लोग डुबकी लगाने पहुंचते हैं।
मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र राजा बसु ने राजगीर के ब्रह्मकुंड परिसर में एक यज्ञ कराया था। इस दौरान देवी-देवताओं को एक ही कुंड में स्नान करने में परेशानी होने लगी। तब ब्रह्मा ने यहां 22 कुंड का निर्माण कराया। वैभारगिरी पर्वत पर भेलवाडोव तालाब है, जिससे ही जल पर्वत से होते हुए यहां पहुंचता है। इस पर्वत में कई तरह के केमिकल्स जैसे सोडियम, गंधक, सल्फर हैं। कहा जाता है की इसी कारण यहां का पानी गर्म होता है।
राजगीर एक प्रसिद्ध धार्मिक पौराणिक साहित्य के अनुसार राजगीर बह्मा की पवित्र यज्ञ भूमि, संस्कृति और वैभव का केन्द्र तथा जैन तीर्थंकर महावीर और भगवान बुद्ध की साधनाभूमि रहा है।जैन परम्परा के अनुसार महावीर का निवास स्थल विपुलगिरि के गुणशीलक (गुणशील) चैत्य में था। उन्होंने अपने चौदह वर्षावास राजगृह में व्यतीत किये थे। दिगम्बर परम्परा के अनुसार महावीर ने अपना प्रथम धर्मोपदेश विपुलगिरि पर दिया था। वे अनेक बार इस पहाड़ी पर आये और अपना धर्मोपदेश दिया यहां हिन्दु, जैन और बौद्ध तीनों धर्मों के धार्मिक स्थल हैं। बौद्ध धर्म से इसका बहुत प्राचीन संबंध है। बुद्ध न सिर्फ़ कई वर्षों तक यहां ठहरे थे बल्कि कई महत्वपूर्ण उपदेश भी यहां की धरती पर दिये थे। बुद्ध के उपदेशों को यहीं लिपिबद्ध किया गया गया था और पहली बौद्ध संगीति भी यहीं हुई थी।वी एन आई

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