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बैसाखी -ब्रिटेन की बहु-जातीय, बहु-आस्था वाले लोकतांत्रिक देश का उत्सव- ब्रिटिश प्रधानमंत्री कैमरून


Vniindia.com | Tuesday April 14, 2015, 04:31:06 | Visits: 1656







नई दिल्ली,14 अप्रैल (अनुपमा जैन,वीएनआई) ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने क्रिसमस, दिवाली, ईद की तरह बैसाखी के पर्व के अवसर पर आज देशवासियो को बधाई देते हुए कहा है कि यह ब्रिटेन की बहु-जातीय, बहु-आस्था वाला लोकतांत्रिक देश का उत्सव है. प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने एक संदेश में ब्रिटेन की प्रगति मे सिख समुदाय की भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए कहा \'हम ब्रिटेन की प्रगति मे सिख समुदाय के योगदान के लिये उनके आभारी है,बैशाखी बहु-जातीय, बहु-आस्था वाले लोकतांत्रिक देश का उत्सव है‘

इस अवसर पर भारत, ब्रिटेन एवं पूरी दुनिया भर के लोगो को बधाई देते हुए कहा ‘ सिख समुदाय के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण अवसर है साउथ हॉल से लेकर सुंदरलैंड, ओटावा से लेकर अमृतसर तक दुनिया भर के सिख जीवंत उत्साह के साथ बैशाखी का पर्व मनाते हैं.‘ बैसाखी हमें ब्रितानी सिखों के बेशुमार योगदान का समारोह मनाने का भी अवसर देता है जिन्होंने 160 वर्षों से अधिक समय से हमारे देश को समृद्ध बनाया है। चाहे यह उद्यम के क्षेत्र में हो या व्यवसाय शिक्षा, सार्वजनिक सेवा या सिविल सोसाइटी, ब्रिटेन के सिख सफलता की गाथा हैं \'

प्रधान मंत्री केमरून ने कहा‘ यह योगदान सभी के सामने है लीमिंगटन और वारविक के भव्य गुरूद्वारा साहेब में मैं खुद सिखवाद के मूल्यों-करूणा, शांति और समानता को व्यवहार में लाते देखता हूं और देश भर में देखता हूं कि किस , चाहे वह सिख और एशियाई व्यवसायी और महिलाएं रोजगार और अवसरों का सृजन कर अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना लेकिहो, हर जगह इसे देखा जा सकता है , और यह योगदान केवल हाल की बात नहीं है, यह सालों, साल पुरानी बात है , इसकी साक्षात मिसाल 100 वर्ष पहले प्रथम विश्व युद्ध के दौरान देखने को मिली. इस क्रम मे प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश फौजो मे शामिल् भारतीय सैनिको के बलिदान और शौर्य की चर्चा करते हुए उन्होने कहा ‘ हमने पिछले महीने ही इस युद्ध मे अपने प्राणो की शहादत करने वाले भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी जिनमें कई सिख थे जिन्होंने उत्तरी फ्रांस में न्यु शैपल की लड़ाई में मित्र देशों के साथ मिल कर बहादुरी से लड़ाई लड़ी थी। मैं उन लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं जिन्होंने अपने घरों से इतनी दूर आकर लड़ाई लड़ी और आजादी की लड़ाई में अपने साथियों के साथ शहीद हो गए। हम उनकी कुर्बानी को कभी विस्मृत होने नहीं देंगे। \'

विद्वानों के मुताबिक हिन्दू पंचाग के अनुसार गुरु गोविन्दसिंह ने बैसाख माह की षष्ठी तिथि के दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी। इसी दिन मकरसंक्रांति भी थी। इसी कारण से बैसाखी का पर्व सूर्य की तिथि के अनुसार मनाया जाने लगा। सूर्य मेष राशि में प्राय: 13 या 14 अप्रैल को प्रवेश करता है, इसीलिए “पर्वों का महापर्व” है बैसाखी भी इसी दिन मनायी जाती है।

प्रत्येक 36 साल बाद भारतीय चन्द्र गणना के अनुसार बैसाखी 14 अप्रैल को पड़ती है ।।वी एन आई

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